दो बेटियों ने लिवर का हिस्सा देकर बचाई पिता की जिंदगी, नोएडा अस्पताल में हुआ दुनिया का पहला लैपरोस्कोपिक डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट

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Two daughters saved their father's life by donating parts

नई दिल्ली। हेपेटाइटिस-बी संक्रमण के कारण एंड-स्टेज लिवर रोग से पीड़ित किर्गिस्तान के 51 वर्षीय मरीज अमनझोल ताजिमातोव की 20 और 21 वर्षीय दो बेटियों से उनके लिवर का हिस्सा लेकर ‘लैपरोस्कोपिक डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर प्रत्यारोपण’ कर पिता को नया जीवन दिया।

फोर्टिस अस्पताल नोएडा में हुए इस लैपरोस्कोपिक डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर प्रत्यारोपण की खास बात यह रही कि दोनों डोनरों की लिवर डोनेशन सर्जरी पूरी तरह लैपरोस्कोपिक तकनीक से की गई, अस्पताल ने दावा किया कि इस तरह का लैपरोस्कोपिक डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर प्रत्यारोपण अपनी तरह का दुनिया का पहला मामला है। उन्होंने इसे देश और अस्पताल के लिए नई उपलब्धि बताया।

लैपरोस्कोपिक डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर प्रत्यारोपण करने वाली चिकित्सकों की टीम का नेतृत्व कर रहे फोर्टिस नोएडा के चेयरमैन लिवर प्रत्यारोपण एवं हेपेटोबिलियरी साइंसेज डा. विवेक विज ने बताया कि प्रत्येक डोनर की सर्जरी में करीब पांच घंटे लगे जबकि प्रत्यारोपण करीब आठ घंटे में पूरा हुआ।

बताया कि सर्जरी के बाद मरीज और दोनों डोनर स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं। एक प्रश्न के उत्तर में डॉ. विवेक विज कहाकि यह तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल प्रक्रिया है, जो दुनिया के चुनिंदा केंद्रों पर ही की जाती है। इससे डोनरों को कम दर्द, कम रक्तस्राव और तेजी से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

फोर्टिस नोएडा के जोनल डायरेक्टर मोहित सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि जटिल लिवर प्रत्यारोपण में अस्पताल की वैश्विक विशेषज्ञता और क्लीनिकल उत्कृष्टता को रेखांकित करती है।